योग और आयुर्वेद का महत्व
उदास मन और अस्वस्थ तन से कोई कार्य नहीं होता |
नमस्ते मैं शिखा आप सभी का अपने इस आर्टिकल में अभिनन्दन करती हूँ |
मेरी माँ हमेशा कहती है कि इस शरीर से जितना काम ले सकते हो ले लीजिये भगवान् ने हमे संपूर्ण बनाकर अपनी कृपा की है |
अब हमारे कर्म ही हमारा भविष्य निर्धारित करेंगे|
मैं आप सभी से योग और आयुर्वेद के बारे में बात करने वाली हूँ |
हमें अपने पूर्वजो से योग और आयुर्वेद विरासत में मिला है पर हम आधुनिक दुनिया की चकाचौंध में इस विरासत की शक्ति को नहीं समझ पाए |
कोरोना की महामारी ने हमे वापस आयुर्वेद और योग की और मोड़ दिया हैं | योग और आयुर्वेद की जुगलबंदी की ताकत को विश्व ने देख भी लिया और मान भी लिया है |
योग शब्द सबसे पहले ऋग्वेद में लिखा गया |
योग शब्द की उत्पत्ति संस्कृत के युज शब्द से हुई जिसका अर्थ होता है -जोड़ना
योग हमारे भारतवर्ष का प्राचीन विज्ञान है |
आयुर्वेद का अर्थ है -जीवन का ज्ञान
हर वर्ष २१ जून को सारा विश्व अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाता है | यह हर भारतीय के लिए गर्व की बात है |
प्रधानमंत्री मोदी जी ने कहा -योग हमारे प्राचीन भारत का अमूल्य उपहार है |
शरीर और मन का संतुलन रखने मे योग की महत्तपूर्ण भूमिका होती है |
आसन करने से शरीर लचीला और शक्तिशाली बनता है |
प्राणायाम से आतंरिक तंत्र मजबूत होता है |
ध्यान करने से मन शांत और एकाग्रचित्त रहता है |
इसीलिए आप सभी से निवेदन है कि योग को अपनाये और शरीर को स्वस्थ बनाये |
धन्यवाद !
आभार !
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